TDS kya hai ? टीडीएस क्यों काटा जाता है, पूरी जानकारी।

आज के इस पोस्ट में हम बात करने वाले है TDS kya hai ? टीडीएस क्यों काटा जाता है, TDS Full for in Hindi पूरी जानकारी।आपका जो भी टीडीएस कटता है, वह आपके PAN नंबर पर कटता है। PAN नंबर के माध्यम से ये सारी कटौतियां Form 26AS मेें दर्ज होती जाती हैं।

पहले हमें यह जानना बेहद आवश्यक है। कि TDS वास्तव में होता क्या है? बात करें – टीडीएस की तो टीडीएस का फुल फॉर्म Tax Deducted at Source होता है।आमदनी देने के पहले टैक्स काटकर सरकार के पास जमा कर देने की प्रक्रिया को ही TDS कहते हैं। इसे आपके Income Tax Account में दर्ज भी कर दिया जाता है। फॉर्म 26 AS में इसके पूरे डिटेल्स दर्ज होते जाते हैं।

TDS kya hai ? टीडीएस क्यों काटा जाता है, पूरी जानकारी।

टीडीएस यानी कि जब आप हर महीने अपना वेतन पाते हैं तो उसमें से कुछ प्रतिशत रकम पहले से ही कट जाती हैं। वह कटी हुई रकम कर के रूप में सरकार तक पहुँचती हैं और उस रकम को ही टीडीएस कहते है। टीडीएस सिस्टम में, टैक्स संबंधी, ज्यादातर प्रक्रियाएं नियोक्ता या टीडीएस काटने वाला ही निपटाता है। आपको सिर्फ साल के अंत में रिटर्न दाखिल करना होता है।

TDS क्या है और क्यों कटता है?

TDS कटने के पश्चात भी यदि किसी प्रकार का टैक्स बकाया रह जाता है। तो उसे भी भुगतान करना चाहिए। टीडीएस देश चलाने के लिए काटा जाता है। सरकार द्वारा कर दो प्रकार से लिया जाता है Direct Tax और Indirect Tax अथवा प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर यह टैक्स आपकी आमदनी के हिसाब से कटता है

How to know, How much TDS has been deducted from the account

  • सबसे पहले आपको इनकम टैक्स विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट www.incometaxindiaefiling.gov.in  पर जाना होगा।

टीडीएस क्या है? टीडीएस कैसे निकालें

  • वेबसाइट पर पहुंचने के पश्चात आपको अपने अकाउंट में लॉग इन करना होगा।
  • आपको माय अकाउंट ड्रॉप डाउन मेनू में View Tax Credit (Form 26AS) पर क्लिक करना होगा।
  • आपको कंफर्म बटन पर क्लिक करना होगा।
  • आपके सामने एक नया पेज ओपन होगा। यहां पर आपको Click View Tax Credit (Form 26AS) to view your Form 26AS. क्लिक करना होगा।
  • इस तरह से आप अपना टीडीएस अमाउंट देख सकते है|

TDS Full form in Hindi

Tax Deducted At Source  टीडीएस फुल फॉर्म हिन्दी में  – “स्त्रोत पर कर कटौती” होता है।

TDS Deduction Rules

  • TDS काटने  के पश्चात कलेक्ट की गई धन राशि को अगले महीने की 7 तारीख तक सरकार के पास जमा करना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है। तो हर महीने 1.5% की दर से अलग ब्याज देना पड़ सकता है।
  • हर महीने टीडीएस काटा जाता है। जिसका रिटर्न हर तिमाही के अगले महीने की अंतिम तारीख तक दाखिल किया जाना चाहिए। अर्थात एक 31 जुलाई, 31 अक्टूबर, 31 जनवरी और 31 मई तक जमा करना चाहिए।
  • टीडीएस ना भरने पर आपको ब्याज चुकाना पड़ सकता है. टीडीएस डिडक्शन (कटौती) में अगर देरी की जाती है तो  कर कटौती ना होने तक हर महीने 1% की दर से इंटरेस्ट भरना पड़ता है.

आपको भुगतान करने वाला आपकी इनकम पर 10% टीडीएस कटता है और यदि आपके पैन कार्ड की जानकारी नहीं होने पर 20% टीडीएस कटता है। टीडीएस एक ऐसा वित्तीय शुल्क है जो सरकार द्वारा किसी व्यक्ति या संस्था से राजस्व प्राप्त करने के लिए लगाया जाता है, ऐसा करके प्राप्त हुए धनराशि को विभिन्न सार्वजनिक कार्य करने के लिए उपयोग में लिया जाता है।

टीडीएस कटौती का विवरण दर्ज कहां होता है?

PAN-Card

आपके PAN नंबर पर कटता है। PAN नंबर के माध्यम से ये सारी कटौतियां Form 26AS मेें दर्ज होती जाती हैं। TDS काटने की जिम्मेदारी उस व्यक्ति/संस्थान की होती है, जो पैसों का भुगतान कर रहा है। बाद में वह इसे सरकार के खाते में जमा कर देता है।टीडीएस की तो टीडीएस का फुल फॉर्म Tax Deducted at Source होता है।

टीडीएस क्यों कटता है

भारत की जनसंख्या करीबन सवा सौ करोड़ के लगभग हैं देश में सरकार द्वारा सभी के लिए अनेक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। तो उन सुविधाओं को प्रारंभ करने के लिए धन की आवश्यकता होती है, वो धन हम और आप से टीडीएस के रूप में इकट्ठा किया जाता है।

टीडीएस के रूप में सरकार के पास जमा होगा धन सरकार जनता को अनेक सुविधा प्रदान करने के रूप में वापस लौटा देती है, अथार्थ आपके द्वारा भरा गया टैक्स सरकार देश के विकास के लिए खर्च करके आपको बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाती हैं। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड टीडीएस को आयकर अधिनियम 1961 के अंतर्गत नियंत्रित करता हैं।

टीडीएस रिफंड करने के लिए आपको अपना अकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड जैसी जानकारी देनी ज़रूरी है. इन्हीं के अनुसार आपकी एक फाइल बनाई जाएगी जो जानकारी के अभाव में संभव नहीं है.

इन सब के बाद अगर ये पाया जाता है कि आपके द्वारा जमा किया गया टैक्स लीगल अमाउंट से ज्यादा है तो उतनी ही धनराशि आपको रिफंड कर दी जाती है.

टैक्स दो तरह का होता है;

  • डायरेक्ट या प्रत्यक्ष कर
  • इनडायरेक्ट या अप्रत्यक्ष कर

टीडीएस सर्टिफ़िकेट एक प्रमाण-पत्र हैं जो स्त्रोत यानि जो टीडीएस काटता हैं उसके द्वारा दिया जाता हैं| मान लीजिए आप की कुल कर योग्य आय ₹50000 है। और आपका एक वित्तीय वर्ष में ₹70000 टीडीएस काटा गया है। तो आप आईटीआर भरने में अतिरिक्त काटे गए 20000 टीडीएस को वापस पाने के लिए क्लेम कर सकते हैं।

TDS kya hai (FAQ):

TDS का क्या अर्थ है?

टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स यानि स्त्रोत पर की गई टैक्स (कर) कटौती। इस पद्धति के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति (कटौती करनेवाला/ डिडक्टर) किसी अन्य व्यक्ति को भुगतान करने के लिए ज़िम्मेदार है तो वह सोर्स (स्त्रोत) पर टैक्स में डिडक्शन (कटौती) कर शेष रकम डिडक्टी को ट्रान्स्फर करेगा।

TCS कब काटता है?

इन वस्‍तुओं में टिंबर वुड, स्‍क्रैप, मिनरल, तेंदु पत्‍ते शामिल हैं। इस तरह का टैक्‍स तभी काटा जाता है जब पेमेंट एक सीमा से ज्‍यादा होता है।

टैक्स कितनी सैलरी पर लगता है?

इनमें 2.5 लाख से 5 लाख तक की आय वालों पर 5 फीसदी टैक्स लगाया जाता है. वहीं 5 लाख से 7.5 लाख तक की आय वालों पर 10 फीसदी टैक्स देना होता है जबकि 7.5 लाख से 10 लाख रुपए तक की सालाना इनकम वालों पर 15 फीसदी टैक्स लगता है. 10 लाख रुपए से 12.5 लाख रुपए की सालाना कमाई पर 20 फीसदी टैक्स चुकाना होगा |

बैंक में कितने पैसे पर टैक्स लगता है?

सेविंग बैंक अकाउंट में कैश जमा करने की लिमिट 1 लाख रुपये है. सेविंग खाते में अगर 1 लाख रुपये से अधिक जमा करते हैं तो टैक्स विभाग के कान खड़े हो सकते हैं. आपके डिपॉजिट का सोर्स पता लगाया जा सकता है और गड़बड़ी पाए जाने पर नोटिस चस्पा किया जा सकता है|

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Conclusion निष्कर्ष:

आशा करता हु दोस्तों आपको ये पोस्ट जरूर पसंद आया होगा। और इस पोस्ट मे मेने TDS kya hai ? टीडीएस क्यों काटा जाता है, इसके बारे मे पूरी जानकारी दी हुई है।

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